Thursday, April 17, 2008

मेरी कहानी

कई मोड़ों की है मेरी कहानी
रास्‍तों में कड़ी धूप की है मेरी कहानी
बात बहुत लंबी है पर रात है छोटी
कहॉं तक सु‍नि‍एगा आप मेरी कहानी

शबाब पर है आज की शाम
लबों के मुंति‍जर हैं हाथों के जाम
आज अब रहने दें
फि‍र कभी सुन ली‍जि‍एगा बाकी कहानी

मथुरा कलौनी

2 comments:

~nm said...

कुछ शब्दों में बहुत कुछ बोलने वाली कविता

Madhumita. said...

Hmmm ...